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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

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वियान में बिताया यह समय मेरे जीवन का सबसे अधिक उदासीनता का समय था आज भी उसकी स्मृति मुझे अत्यंत उदासीन बना देती है, फेसियन कस्बे में किस प्रकार मैंने गरीबी के पांच वर्ष बिताए, और उन पांच वर्षों में किस कठिनाई से मैं अपनी आजीविका कमाता था, यह सब बड़ा ही दुखद है।  मैं पहले दैनिक श्रमिक रूप में और फिर लघु चित्रों के निर्माता चित्रकार के रूप में जीवन जीता था, यह दोनों धंधे बहुत कम आय वाले थे, इनसे होने वाली आय से तो मेरी भूख भी पूरी तरह नहीं मिटती थी, अब मैं क्या कहूं यह भूख तो मेरे जीवन की स्थाई साथी बन गई, जिसने मुझे कभी भी नहीं छोड़ा, मेरी हर आवश्यकता के साथ जुड़ी रही, मेरे लिए पुस्तक खरीदने का अर्थ था आने वाले दिनों में भूखा रहना। फेसियन जाति के एक व्यक्ति से मेरी मित्रता हो गई, इस बेदर्द मित्र के साथ मेरा हमेशा झगड़ा रहता था, परंतु फिर भी उस दौरान इस मित्र से मैंने जितना सीखा उतना पहले कभी नहीं सीखा था, कभी वास्तुकला के अध्ययन के लिए तो कभी संगीत समारोह में जाने के लिए और फिर कभी पुस्तकें खरीदने के लिए मुझे भूखा रहना पड़ता था, इन तीनों के अतिरिक्त मुझे जीवन में और कुछ अच्छा नहीं लगता

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यह मेरा सौभाग्य है कि भगवान ने मुझे "ब्राउनाउ ऑन द इन" में उत्पन्न किया, जर्मन आस्ट्रिया हमारी मातृभूमि महान जर्मनी को वापस मिलना ही चाहिए, मेरी इस मान्यता का आधार आर्थिक दृष्टिकोण कदापि नहीं, यदि इस पुनर्गठन से देशवासियों को आर्थिक हानि भी उठानी पड़े तो भी मैं चाहूंगा, कि यह पुनर्गठन अवश्य ही होना चाहिए, क्योंकि एक ही खून के लोगों का एक ही राइख अर्थात साम्राज्य में होना जरूरी है। इस छोटे से कस्बे में मेरे माता-पिता निवास करते थे, यह कस्बा खून से तो बवेरियन था, परंतु आस्ट्रिया राज्य के नियंत्रण में था, मेरे पिता एक असैनिक कर्मचारी थे, मेरी माता घर की देखभाल करती थी। जब हिटलर 13 वर्ष का था तब उसके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और जब वह 16 साल का हुआ तब उसकी माता की मृत्यु हो चुकी थी हिटलर की मां एक लंबी और पीड़ादायक बीमारी का शिकार हो गई थी। गरीबी और जीवन के कठोर तथ्य ने मुझे मजबूर कर दिया, कि मैं अपने भावी जीवन तथा व्यवसाय के संबंध में शीघ्र ही कोई उपयुक्त फैसला करू, परिवार के सीमित साधन तो माता की बीमारी में लगभग समाप्त हो चुके थे, अनाथ होने के कारण मुझे मिलने वाला सरकारी भत्ता,