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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

सफ़लता के लिए आपमें किन गुणों का होना आवश्यक है

वास्तविकता चाहे जो हो, जब आप किसी बात को सही मान लेते हैं, तो वही आपके लिए सच बन जाती हैं। एरिस्टोटल ने लिखा था, जिस किसी भी बात का प्रभाव आप पर पड़ता है, वही अभिव्यक्ति होती है। आपका बाहरी व्यवहार ठीक वैसा ही होता है, जैसा आप भीतर से महसूस करते हैं, आपकी जिंदगी में तमाम सुधारों का आगाज़ आपकी खुद के बारे में सोच में सुधार के साथ ही होता है। आपकी खुद के बारे में सोच ही आपके निजी विचारों और व्यक्तित्व का आधार होती है। व्यक्तित्व या प्रदर्शन के किसी भी हिस्से में सुधार आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है, और आपको खुद को ज्यादा पसंद करने और सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है। आप खुद को जितना ज्यादा पसंद करते हैं, अपनी नजरों में आपकी छवि और प्रदर्शन उतने ही बेहतर होंगे। साथ ही आप अपने द्वारा तय आदर्श पर खरे उतरने की और तेजी से बढ़ने लगेंगे। आप अपने आपको जितना ज्यादा पसंद करेंगे, आपका नाकामी का डर उतना ही कम होता जाएगा। आप अपने आपको पसंद करने के बाद अपने लक्ष्य और स्तर के आधार पर आप जितने ज्यादा फैसले लेंगे, आप दूसरों की प्रतिक्रिया की उतनी ही कम परवाह करने लगेंगे। आप जिस वक्त अपनी सोच के आधार पर