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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

स्वयं के प्रति ईमानदार बने

जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के पूर्व अध्यक्ष, जेक वेल्श को कारोबार की दुनिया के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में से एक माना जाता रहा है, उनका कहना था कि नेतृत्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण इकलौता गुण, उनके शब्दों में "वास्तविकता का सिद्धांत" है, वास्तविकता के इस सिद्धांत अनुसार, आपको दुनिया से उसी तरह से व्यवहार करना होगा, जैसी कि वह है, न कि जैसी कि आप चाहते हैं।  आपको अपने और हालात के प्रति पूरी तरह से ईमानदार होना चाहिए, आपको दिनदहाड़े सपने देखना छोड़ देना चाहिए, और केवल इसलिए हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे रहना चाहिए, कि आप कुछ करें या न करें, सब कुछ अपने आप हो जाएगा, खासतौर पर जब बात निजी संपत्ति बनाने की हो तो आपको खुद के प्रति ईमानदार होना चाहिए।  अगर आप वाकई धनवान बनना चाहते हैं, तो आप अपने दिमाग के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते, आप ऐसी ख्वाहिश, उम्मीद या दुआ नहीं कर सकते कि आप कोई लॉटरी जीतकर या किसी तरह किस्मत के सहारे या किसी बाहरी चमत्कार से धनवान बन जाएंगे। कामयाबी हासिल करने में किस्मत की क्या भूमिका है, मैंने किस्मत की सोच का बरसों से अध्ययन किया है, मेरा निष्कर्ष यह है कि किस्मत शब्द का