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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

आर्थिक संकट

रुपए का अवमूल्यन आर्थिक संकट को स्पष्ट करता है जिसमें रुपए की कीमत गिर के नीचे आ जाती है और व्यक्ति की जरूरतमंद चीजों का भाव बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे व्यक्ति की जेब से पैसा खत्म होता जाता है और उसे पता ही नहीं है कि यह पैसा कैसे खत्म हो गया। व्यक्ति की जेब में पैसा कब आता है जब बाजार में सामान की कीमत गिरती है और व्यक्ति को सामान कम कीमत में प्राप्त होता है जब सामान कम कीमत में प्राप्त होता है तो उसकी जेब में पैसा बचना शुरू हो जाता है। जिसके फलस्वरूप यह माना जा सकता है कि बाजार में आर्थिक संकट नहीं है बल्कि बाजार तेजी की ओर अग्रसर हो रहा है। इसके विपरीत अगर देखा जाए तो वर्ष 1997 में एशिया में आर्थिक संकट आया था जिसमें स्थानीय करेंसी रूपया का कुछ ही महीनों में 85 प्रतिशत तक अवमूल्यन हो गया। जब रुपए का अवमूल्यन होता है तो देश में आर्थिक संकट उत्पन्न होता है और सामान की कीमतों के भाव बढ़ने लगते हैं और कुछ ही समय में सामान की कीमतों के भाव दुगने हो जाते हैं। जब रुपए का अवमूल्यन होता है तो इसमें मुख्य भूमिका सरकार चलाने वाले उन राजनीतिज्ञों की होती है जो आर्थिक विकास की बात करते हैं और सर