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हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा शोध लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा शोध

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में 1979 और 1989 के बीच हार्वर्ड में हुए एक अध्ययन के बारे में बताया गया है, 1979 में हार्वर्ड कि एमबीए ग्रैजुएट्स से पूछा गया, क्या आपने अपने भविष्य के लिए स्पष्ट लिखित लक्ष्य तय किए हैं और उन्हें हासिल करने की कोई योजना बनाई है ? पता चला कि सिर्फ 3 प्रतिशत ग्रैजुएट्स के पास लिखित लक्ष्य और योजनाएं थी, 13 प्रतिशत के पास लक्ष्य तो थे लेकिन उन्होंने लिखें नहीं थे, 84 प्रतिशत के पास स्पष्ट लक्ष्य ही नहीं थे सिवाय इसके कि वह बिजनेस स्कूल से जाने के बाद गर्मियों का आनंद लें। दस साल बाद 1989 में शोधकर्ताओं ने उस क्लास के सदस्यों से दोबारा संपर्क किया उन्होंने पाया कि जिन 13 प्रतिशत के पास अलिखित लक्ष्य थे वे लक्ष्य न बनाने वाले 84 प्रतिशत विद्यार्थियों से औसतन दोगुना कमा रहे थे लेकिन उनमें सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह थी कि हार्वर्ड छोड़ते वक्त जिन 3 प्रतिशत ग्रेजुएट्स के पास स्पष्ट, लिखित लक्ष्य थे वे बाकी सभी 97 प्रतिशत से औसतन दस गुना ज्यादा कमाई कर रहे थे इन लोगों के मामले में इकलौता फर्क स्पष्ट लक्ष्यों का था जो उन्होंने पढ़ाई पूरी करते वक्त बनाए थे। स्पष्टता का महत्