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समय का प्रबंधन आपका मूल्य तय करता है

समय का प्रबंधन दरअसल जीवन का प्रबंधन है, आपकी व्यक्तिगत उत्पादकता को बेहतर बनाने का काम आपके मूल्यों के परीक्षण से शुरू होता है।  मर्फी का नियम कहता है कि कोई चीज़ करने से पहले आपको कोई दूसरी चीज़ करनी पड़ती है। समय का उचित प्रबंधन करना भी तब तक संभव नहीं है, जब तक आपको सटीकता से यही ना मालूम हो कि आपका मूल्य क्या हैं। समय के अच्छे प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि आपका घटनाओं के क्रम पर अपना नियंत्रण आपके लिए सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण आदर्शों के सामंजस्य में हों। यदि यह आपके लिए महत्त्वपूर्ण नहीं है, तो आप अपने समय का नियंत्रण हासिल करने के लिए कभी प्रेरित और संकल्पवान महसूस नहीं करेंगे। हर इंसान को जीवन में अर्थ और उद्देश्य की गहरी ज़रूरत होती है। व्यक्तिगत तनाव और अप्रसन्नता के मुख्य कारणों में से एक यह भावना है कि आप जो कर रहे हैं, उसका आपके सबसे अंदरूनी मूल्यों और विश्वासों के संदर्भ में कोई अर्थ और उद्देश्य नहीं है। आपको हमेशा यह प्रश्न पूछकर शुरू करना चाहिए, "क्यों?" आप समय प्रबंधन की तकनीकों में ज़्यादा कार्यकुशल बन सकते है लेकिन इससे आपका कोई भला नहीं होगा, अगर आप किसी अर्

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अगले दिन से ही उसने अपने इस संकल्प को साकार करना आरंभ कर दिया। यह ज़बर्दस्त कामयाबी हासिल करने वालों की एक और ख़ासियत होती है कि वे किसी अच्छे विचार के दिमाग़ में आने के बाद केवल उस पर सोचते ही नहीं बैठते, बल्कि तत्काल काम में जुट जाते हैं। उस युवक ने हर रोज़ अपने बॉस से पंद्रह मिनट पहले आकर पंद्रह मिनट बाद जाने का सिलसिला आरंभ कर दिया। जब उसके बॉस काम से घर चले जाते थे, वह युवक तब भी काम करता रहता था।

बॉस ने कुछ दिन तक उसे कुछ भी नहीं कहा। फिर, आख़िर एक दिन काम के बाद, बॉस ने उसकी डेस्क पर आकर उससे पूछा कि वह हर वक्त ऑफ़िस में ही कैसे दिखता है, जबकि उसके सभी साथी चले जाते हैं। युवक ने जवाब दिया कि वह कंपनी में कामयाबी हासिल करना चाहता है और वह जानता है कि यह तब तक संभव नहीं है, जब तक वह सबसे ज़्यादा मेहनत करने के लिए तैयार न हो।

बॉस मुस्कुराया और सिर हिलाकर चला गया। इसके बाद, बॉस ने उसे एक ऐसा काम सौंपा जो कि आम तौर पर उसके काम का हिस्सा नहीं था। उसने तत्काल इसे करके बॉस को सौंप दिया और अपनी डेस्क पर अपने काम के लिए लौट गया।

इसके तत्काल बाद, उसे एक और काम दिया गया और उसने वह भी जल्दी से निपटा दिया। एक साल के भीतर, उस युवक को उसके नियमित काम के अलावा भी कई ज़िम्मेदारियाँ दी गईं और उसने हर एक को स्वीकार कर जल्दी ही पूरा कर दिया। 

दूसरे ही साल, उसे ऊँचे पद पर तरक्क़ी दे दी गई। उसने पढ़ाई की, अपने कौशल को और अधिक निखारा और मेहनत के साथ काम को जारी रखा। कुछ ही सालों में उसने अपने सभी साथियों को पीछे छोड़ दिया था। उसने अन्य मैनेजरों का भी सम्मान हासिल कर लिया था। उन्होंने उसे जल्द ही तरक्की देकर स्टाफ़ की बजाय अपने में ही शामिल कर लिया। आख़िरकार एक दिन वह कंपनी का वाइस प्रेसीडेंट बना।

यह रणनीति हर उस व्यक्ति के लिए कारगर साबित हो सकती है, जो कि अपने काम के अलावा भी कोई अन्य ज़िम्मेदारी निभाना चाहता है। यह हर किसी के लिए कारगर साबित हो सकती है।


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