सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

बाहरी आवरण आंतरिक आवरण का ही प्रतिबिंब है ?

मानव जीवन एक परिवर्तनशील जीवन है, इस जीवन में कितने ही उतार-चढ़ाव आते हैं, और आकर चले जाते हैं, लेकिन मानव जीवन परिवर्तित होता रहता है, और जीवन का दूसरा नाम ही परिवर्तन है, जिस व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन नहीं है, तो आप कह सकते हैं, कि ऐसा व्यक्ति जीवन में स्थायित्व को धारण किए हुए हैं, जिसे वह व्यक्ति बदलना नहीं चाहता। 

आप जीवन में कितना हासिल कर सकते हैं, यह सिर्फ आप पर निर्भर करता है, आप जीवन में अपने आपको कितना काबिल समझते हैं, इस वास्तविकता की सीमा केवल आपमें है, और आप ही उसे तय कर सकते हैं कोई और नहीं।

रॉबर्ट कोलियर : 
दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो आप हासिल नहीं कर सकते, बस एक बार मन में यह ठानने की देर है, कि इसे हासिल कर सकते हैं।

कुछ ऐसे सिद्धांतों का पता चला है, जो सदियों से महान सफलताओं और उपलब्धियों के कारण रहे हैं, ऐसे कारण जो व्यक्ति के जीवन को बदलने के लिए आवश्यक है, आशावाद और संभावनाओं के इन विचारों को पहली बार जब सुना गया, तो उनकी सोच बदल गई, ऐसी सोच जो मानसिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों पर बात की जाए, तो शायद सबसे महत्वपूर्ण होगी कि "आप वही बन जाते हैं जिसके बारे में आप ज्यादातर वक्त सोचते हैं" आपके जीवन की बाहरी दुनिया दरअसल आपके भीतर की दुनिया का ही प्रतिबिंब है, आपका बाहरी व्यवहार वही बात बताता है, जो कुछ आपके भीतर चल रहा होता है, आप किसी भी व्यक्ति के भीतर की स्थिति को जानने के लिए उसके बाहरी जिंदगी के आवरण को जानकर आप बता कर सकते हैं, कि उसके भीतर क्या चल रहा है, भीतरी आवरण और बाहरी आवरण में ज्यादा फर्क नहीं होगा।

आपके जीवन में आपकी सोच ही आपको विजेता या पराजित बना सकती है, सम्पन्न या गरीब बना सकती है, सम्मानजनक या उपेक्षित बना सकती है, आपकी सोच और उसके कारण आपके द्वारा उठाए गए हर कदम आपकी पूरी जिंदगी की दशा और दिशा को तय करते हैं, सबसे बड़ी बात यह है, कि आपके विचार पूरी तरह से आपके नियंत्रण में होते हैं।

व्यक्ति के विचार हर पल बदलते रहते हैं, बदलने का मुख्य कारण, आपका जीवन विचारों, भावनाओं, व्यवहार, ख्वाहिशों, छवियों, भय, उम्मीदों, संदेहों, फैसलों और महत्वाकांक्षाओं का एक जटिल मिश्रण है, और आपके विचार, छवियों और चित्रों का एक पुलिंदा हैं, जो उनसे जुड़ी भावनाओं को जन्म देता है, यह भावनाऐ, आपके बर्ताव और काम के तौर तरीके पर सामने आती है, और आपकी प्रतिक्रिया और परिणाम ही तय करते हैं, कि आपके साथ क्या होगा, जब आप कामयाबी और आत्मविश्वास के बारे में सोचते हैं, तो आप ज्यादा सशक्त और प्रतिस्पर्धी महसूस करते हैं, और आप जो कुछ भी प्रदर्शन करते हैं आप उसमें बेहतर होते हैं।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन को समझे,अपने विचारों को उद्देश्य में परिवर्तित करें

जीवन को समझने के लिए आपको पहले अपने आप को समझना होगा तभी आप जीवन को समझ पाएंगे जीवन एक पहेली नुमा है इसे हर कोई नहीं समझ पाता,  लोगों का जीवन चला जाता है और उन्हें यही पता नहीं होता कि हमें करना क्या था हमारा उद्देश्य क्या था हमारे विचार क्या थे हमारे जीवन में क्या परिवर्तन करना था हमारी सोच को कैसे विकसित करना था,  यह सारे बिंदु हैं जो व्यक्ति बिना सोचे ही इस जीवन को व्यतीत करता है और जब आखरी समय आता है तो केवल कुछ व्यक्तियों को ही एहसास होता है कि हमारा जीवन चला गया है कि हमें हमारे जीवन में यह परिवर्तन करने थे,  वही परिवर्तन व्यक्ति अपने बच्चों को रास्ता दिखाने के लिए करता है लेकिन वे परिवर्तन को सही मुकाम तक पहुंचाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं यह तो उनकी आने वाली पीढ़ी को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है,  कि उनकी पीढ़ी कहां तक सक्षम हो पाई है और अपने पिता के उद्देश्य को प्राप्त कर पाने में सक्षम हो पाई है या नहीं, व्यक्ति का जीवन इतना स्पीड से जाता है कि उसके सामने प्रकाश का वेग भी धीमा नजर आता है, व्यक्ति अपना अधिकतर समय बिना सोचे समझे व्यतीत करता है उसकी सोच उसके उद्देश्य से

दौलत मनुष्य की सोचने की क्षमता का परिणाम है

आपका मस्तिष्क असीमित है यह तो आपकी शंकाएं हैं जो आपको सीमित कर रही हैं दौलत किसी मनुष्य की सोचने की क्षमता का परिणाम है इसलिए यदि आप अपना जीवन बदलने को तैयार हैं तो मैं आपका परिचय एक ऐसे माहौल से करवाने जा रहा हूं जो आपके मस्तिष्क को सोचने और आपको ज्यादा अमीर बनाने का अवसर प्रदान करेगा।  अगर आप आगे चलकर अमीर बनना चाहते हैं तो आपको एक ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसके दरमियान 500 से अधिक व्यक्ति कार्यरत हो ऐसा कह सकते हैं कि वह एक इंडस्ट्रियलिस्ट होना चाहिए या एक इन्वेस्टर होना चाहिए उसको यह मालूम होना चाहिए की इन्वेस्टमेंट कैसे किया जाए। जिस प्रकार व अपनी दिमागी क्षमता का इन्वेस्टमेंट करता है उसी प्रकार उसकी पूंजी बढ़ती है यह उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपनी दिमागी क्षमता का किस प्रकार इन्वेस्टमेंट करें कि उसकी पूंजी बढ़ती रहे तभी वह एक अमीर व्यक्ति की श्रेणी में उपस्थित होने के लिए सक्षम होगा। जब कोई व्यक्ति नौकरी छोड़ कर स्वयं का व्यापार स्थापित करना चाहता है तो इसका एक कारण है कि वह अपनी गरिमा को वापस प्राप्त करना चाहता है अपने अस्तित्व को नया रूप देना चाहता है कि उस पर किसी का अध

जीवन में लक्ष्य कैसे प्राप्त करें।

आज के जीवन में अगर आप कुछ बनना चाहते हैं, तो आपको अपने जीवन को एक लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए, लक्ष्य आपको वह सब कुछ दे सकता है, जो आप पाना चाहते हैं, आपको सिर्फ एक लक्ष्य तय करना है, और उस लक्ष्य पर कार्य करना है, कि आपको उस लक्ष्य को किस तरह हासिल करना है, इसे हासिल करने की आपको योजना बनानी है, और उस योजना पर आपको हर रोज मेहनत करनी है। किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की समय सीमा किसी और पर नहीं केवल आप पर निर्भर करती हैं, कि आप उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या कुछ कर सकते हैं, जब आप किसी लक्ष्य को हासिल करने का इरादा बनाते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए कि जिस इरादे को लेकर आप लक्ष्य को हासिल करने वाले हैं, वह इरादा उस समय तक कमजोर नहीं होना चाहिए जब तक कि आपका लक्ष्य पूर्ण न हो जाए। आपने देखा होगा कि लोग लक्ष्य निर्धारित करते हैं, जब उस लक्ष्य पर कार्य करने का समय आता है, तो कुछ समय तक तो उस लक्ष्य पर कार्य करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उनका इरादा कमजोर हो जाता है, वे हताश हो जाते हैं तो आप मान के चल सकते हैं कि वे जिंदगी में कुछ भी हासिल करने के लायक नहीं। इस सृष्टि पर उन्हीं लोग