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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

हिटलर का जर्मनी के प्रति इतना लगाव क्यू

हिटलर का जन्म जर्मन ऑस्ट्रिया के एक छोटे से कस्बे "ब्राउनाउ आन द इन" में हुआ, हिटलर की विचारधारा थी कि जर्मन ऑस्ट्रिया हमारी मातृभूमि महान जर्मनी को वापस मिलना ही चाहिए, यदि इस पूर्ण गठन से देशवासियों को आर्थिक हानि भी उठानी पड़े तो भी मैं चाहूंगा कि यह पूर्ण गठन अवश्य ही होना चाहिए, क्योंकि एक ही खून के लोगों का एक ही राइख अर्थात साम्राज्य में होना जरूरी है।

इस छोटे से कस्बे में मेरे माता-पिता निवास करते थे, यह कस्बा खून से तो बवेरिया था, परंतु ऑस्ट्रिया राज्य के नियंत्रण में था, मेरे पिता एक असैनिक कर्मचारी थे, मेरी माता घर की देखभाल करती थी, कुछ ही वर्षों के बाद मेरे पिता को यह सीमावर्ती कस्बा इसलिए छोड़ना पड़ा, क्योंकि उन्हें इस घाटी में स्थित पसाऊ में नया पद ग्रहण करना पड़ा था।

पसाऊ में कुछ देर टिकने के बाद मेरे पिता को भी लिंज भेज दिया गया, जहां वह अनंत: सेवानिवृत्त होकर थोड़ी सी पेंशन पर रहने लगे, वास्तव में मेरे पिता एक गरीब और झोपड़ी में रहने वाले के पुत्र थे, उन्होंने निराश होकर बचपन में ही घर छोड़ दिया था, अनुभवी गांव वासियों के लाख समझाने पर भी वे नहीं माने, और किसी हुनर को सीखने के लिए वियाना चले गए, जब यह 13 वर्ष का लड़का 17 वर्ष का युवा बना, तो कारीगरी की ट्रेनिंग परीक्षा पास करने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुआ।

पहले वे असैनिक कर्मचारी बन गये, मेरे विचार से उस समय उनकी आयु 23 वर्ष रही होगी, जब उन्होंने अपना विनिर्दिष्ट एवं निश्चित पद प्राप्त कर लिया, इसी प्रकार मेरे पिता ने अपने निश्चित ध्येय को प्राप्त तो कर लिया, अंत में जब वे 56 वर्ष के हुए, तो उन्होंने सक्रिय सेवा कार्य छोड़ दिया, समय का यह वह दौर था जब मैंने अपने जीवन के प्रारंभिक ध्येय निश्चित करने शुरू किए।

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