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धन संपत्ति के मामले में आपकी सोच...?

मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये। वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई- फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा। वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भ के अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता। एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और 1000 डॉलर के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।" एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को

ब्रह्मांड का नियम

हमारा अस्तित्व इस पृथ्वी के सिवाय और भी जगह हैं लेकिन उसका प्रमाण अभी हमारे पास उपलब्ध नहीं है लेकिन गुरुत्वाकर्षण शक्ति जो पूरे ब्रह्मांड को बांधे रखती है वह इसका प्रमाण है कि इस ब्रह्मांड में और भी हमारी पृथ्वी जैसे स्थान मौजूद होंगे लेकिन वह स्थान हमारे दिमाग से परे है।

जब हम रात को सोते हैं तो हमारे दिमाग को हम साइलेंट मोड पर लाकर छोड़ते हैं वैसा ही सुबह जब हम जागते हैं तो हमारा दिमाग हमें साइलेंट मोड पर ही मिलता है जो एकदम तरोताजा होता है जिसके फलस्वरूप हम अच्छा महसूस करते हैं।

 उसी प्रकार अगर हम रात को सोते समय हम हमारे दिमाग को कोई ऐसी प्रॉब्लम जिसका हल हमें नहीं मिल रहा है उस प्रॉब्लम को हम सोते समय उसका हल ढूंढते हुए सोते हैं तो निश्चित ही संभावनाएं बनती है कि सुबह उठते समय हमें उस प्रॉब्लम का हल मिल जाए जिसको हमने सोते समय याद किया था निश्चित रूप से उस समस्या का हल आपका दिमाग ढूंढने में सक्षम होता है और आपको उस समस्या से निजात दिलाता है। 

यह सब कैसे होता है इसके बारे में आज तक पता नहीं लग पाया है कि व्यक्ति सोते समय भी जागृत कैसे रहता है जो उसके शरीर को नियंत्रण करने की क्षमता रखता है जैसे व्यक्ति सो नहीं रहा हो इसके बारे में बहुत सी किताबों में लिखा हुआ है कि व्यक्ति के सोने के बाद उसका अवचेतन मस्तिष्क जो उसके शरीर को नियंत्रण करने का कार्य करता है जब अवचेतन मस्तिष्क सोने के बाद भी जागृत रहता है तो यह माना जा सकता है कि अवचेतन मस्तिष्क की क्षमता व्यक्ति के सोने के बाद कई गुना बढ़ जाती है जिससे उसके दिमाग में सेटेलाइट की तरह ऐसी तरंगे उत्पन्न हो जाती है जो व्यक्ति को इस पृथ्वी के सिवाय इस ब्रह्मांड में विद्यमान अन्य चीजों का ज्ञान कराती है।

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